मंगलवार, 19 जून 2012

प्रेम


प्रेम आता  है तो बारिश की तरह,
और जाता है तो ,
हमेशा के लिए ,
जीवन में,
एक पतझड़  सा छोड़ जाता है ,
ये न रोके से रुकता है  ,
 न ही बांधे से बंधता है,
तेज़ मूसलाधार बारिश की तरह से ,
बरसता जाता है,
तन मन पर ,
भिगो देता है स्नेह की बौछारों से,
ह्रदय को,
और जब जाता है तो,
गर्म ,खुश्क, बंजर जमीन,
 बना जाता है ह्रदय को,
पत्थर सा कठोर हो जाता है मन,
कर जाता है सूनसान सा जीवन, निर्जन।








2 टिप्‍पणियां:

  1. प्रेम तो आता है फिर जाता नहीं ..
    जो जाता है वो तो प्रेमिका होती है ... जो प्रेम कों आत्मसात करता है उसके जीवन से प्रेम की बूँदें कभी नहीं जातीं ...

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